यंग के प्रयोग में,दो क्रमागत दीप्त फ्रिंजों और दो क्रमागत अदीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।

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(N/A) संपोषी व्यतिकरण (दीप्त फ्रिंजों) के लिए:
$n$-वीं दीप्त फ्रिंज की स्थिति $x_{n} = \frac{n \lambda D}{d}$ द्वारा दी जाती है।
$(n+1)$-वीं दीप्त फ्रिंज की स्थिति $x_{n+1} = \frac{(n+1) \lambda D}{d}$ है।
दो क्रमागत दीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी $\beta = x_{n+1} - x_{n} = \frac{(n+1) \lambda D}{d} - \frac{n \lambda D}{d} = \frac{\lambda D}{d} (n+1-n) = \frac{\lambda D}{d}$ है।
विनाशी व्यतिकरण (अदीप्त फ्रिंजों) के लिए:
$n$-वीं अदीप्त फ्रिंज की स्थिति $x'_{n} = (2n-1) \frac{\lambda D}{2d}$ ($n=1, 2, 3...$ के लिए) है।
$(n+1)$-वीं अदीप्त फ्रिंज की स्थिति $x'_{n+1} = (2(n+1)-1) \frac{\lambda D}{2d} = (2n+1) \frac{\lambda D}{2d}$ है।
दो क्रमागत अदीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी $\beta' = x'_{n+1} - x'_{n} = (2n+1) \frac{\lambda D}{2d} - (2n-1) \frac{\lambda D}{2d} = \frac{\lambda D}{2d} (2n+1-2n+1) = \frac{\lambda D}{2d} (2) = \frac{\lambda D}{d}$ है।
अतः,दो क्रमागत दीप्त फ्रिंजों और दो क्रमागत अदीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी समान होती है,जो $\beta = \frac{\lambda D}{d}$ है,जिसे फ्रिंज चौड़ाई कहा जाता है।

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कॉलम-$I$ कॉलम-$II$
$(A) x = \frac{D \lambda}{d}$ $(P) I_0$
$(B) x = \frac{D \lambda}{4d}$ $(Q) 2 I_0$
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यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में दो कला-संबद्ध स्रोत $O_1$ और $O_2$ को $5000 \text{ Å}$ तरंगदैर्ध्य के एकवर्णी प्रकाश से प्रकाशित किया जाता है। यदि पर्दे पर बिंदु $R$ पर द्वितीय क्रम की अदीप्त फ्रिंज (dark fringe) बनती है,तो पथ अंतर $O_1 R \sim O_2 R$ है ($\mu m$ में)

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